Tuesday, December 27, 2011

                          ज़िंदगी के रंग ....... 


 बिखर जाएंगे हर तरफ, अब ज़िंदगी के रंग |
झूमती ये ज़मी होगी, गुनगुनाएगी पवन      ||

वक्त की आंधी में, उड़ गए थे कभी जो रंग    |
मुस्कराते गुलाल की, खो गयी थी जो उमंग ||

गुमशुदा एहसासों की वही पहचान लेकर ,
आज लौट आया है बसंत ||


बिखर जाएंगे हर तरफ, अब ज़िंदगी के रंग ||
झूमती ये ज़मी होगी, गुनगुनाएगी पवन      ||

दिलों के बीच की सारी, सिमट जाएँगी ये दूरियां |
मतवालों से बचकर कहाँ  जाएँगी अब खुशियाँ ||

थके निढाल सपनों को,
मिल जाएगा अब गगन ||

बिखर जाएंगे हर तरफ, अब ज़िंदगी के रंग ||
झूमती ये ज़मी होगी, गुनगुनाएगी पवन      ||

सपने बुनिए ज़रूर........


ज़िंदगी के  जश्न  में, डूबिये ज़रूर ,
पर चौखट पे चिराग एक, रखिये ज़रूर !!



मंजिल की तरफ कदम तेज़ हों लेकिन,
 गिरते किसी मुसाफिर का, हमसफ़र बनिए ज़रूर !!


बेशक हो चाँद तारो को छूने की ख्वाहिश,
रिश्ता ज़मीन का मगर, याद रखिये ज़रूर
!!



आज़ादी क्या है, क्या हैं इसके मायने,
पिंजरे में कैद परिंदे से, कभी पूछिए ज़रूर !!
 



लगाइए कहकहे, दुनिए के बाज़ार में,
बात कभी दिल से भी,  कीजिये ज़रूर !!



ये सच  है कि अक्सर वो टूट जाते हैं ,
उम्मीद के धागों से मगर, सपने बुनिए ज़रूर !!



हम रहें न रहें, रह जायेंगे कदमो के निशां ,
दीवार पे लिखी इबारत ये, कभी पढ़िए ज़रूर !!



सुनते हैं वो, बेअसर नहीं होतीं,
दुआओं में अपनी, हमें रखिये ज़रूर !!

Monday, December 26, 2011



माँ...

माँ तेरी ममता ही सच्ची,
झूठा है दुनिया का मेला !

दूर गया हूँ जब भी तुझसे,
बार -बार  मैं हुआ अकेला  !! 

बचपन की तेरी वो लोरी,
फिर सुनने  को जी करता है !

बचपन की कोई गुस्ताखी,
फिर  करने को जी करता है !!

डांट को तेरी,  तरस   गया माँ ,
अब तो है, बस दर्द का डेरा !!


माँ तेरी ममता ही सच्ची,
झूठा है दुनिया का मेला !

दूर गया हूँ जब भी तुझसे,
बार -बार  मैं हुआ अकेला  !! 


जीवन की ये राह कठिन है,
थक जाता हूँ, चलते-चलते !

न कोई मीत, न  संगी -साथी  ,
खो  जाते सब मिलते- मिलते !!

तेरी ममता के आँचल में,
देखूं मैं जीवन का सवेरा !! 

माँ तेरी ममता ही सच्ची,
झूठा है दुनिया का मेला !

दूर गया हूँ जब भी तुझसे,
बार -बार  मैं हुआ अकेला  !! 


उंगली पकड़कर, डगमग-डगमग,
कैसे चलना है, तुझसे सीखा !

आंसू को मुस्कान बनाकर,
तुमने इस बगिया को सींचा !!

बदले में कुछ भी ना दे पाया,
कितना  बेबस   हूँ मैं बेटा !! 


माँ तेरी ममता ही सच्ची,
झूठा है दुनिया का मेला !

दूर गया हूँ जब भी तुझसे,
बार -बार  मैं हुआ अकेला  !!