Friday, March 13, 2020

अब रैन कहाँ रे... 

जाग मुसाफिर अब क्या सोवत 
भोर भई अब रैन कहाँ रे |
ज्ञान से महकी सारी दिशाएँ 
तेरी मंज़िल तुझको पुकारे ||

बरसों  बीते भाग पे रोते 
सूख गईं अँखियों की नदियां |

जीवन के दिन ऐसे बीते 
बीत गईं हों जैसे सदियाँ |
|
दीप जला अपने हाथो से 
कर ले जीवन मे उजियारे ||

विद्यालय है ज्ञान का मंदिर
अक्षर के यहाँ दीप जले हैं |

उड़ता जाये मन का पंछी 
पलकों पे फिर सपने सजे हैं ||

सुख दुख के सब भेद हैं खुलते,
आते जब हम इसके द्वारे ||

Friday, March 6, 2020


अद्भुत प्राकृतिक सौन्दर्य को समेटे अमर स्वातंत्र्य वीरों की  धरती
अंडमान निकोबार द्वीप पुंज

अमर शहीदों का ये मंदिर
सारे जहां मे सबसे सुंदर | 
श्रद्धा के हम फूल चढ़ाएँ,
इनकी कहानी भूल न जाएँ ||

सारे जहां से सुंदर
'अंडमान' द्वीप हमारा |
सागर मे  मोतियों सा
'निकोबार' द्वीप प्यारा ||

कुदरत का है एक करिश्मा
देखो 'लाइम-केव' ये अपना |
पंछी गाये गीत खुशी के
'पैरट' द्वीप है सबका सपना ||

'सेल्यूलर' और 'रॉस' मे  बसती
सदियों की एक अमर कहानी |
नाचा था कभी मोर मयूरा
ये गाथा होगी न पुरानी ||

आओ चलें हम उस दुनिया मे
रहती हैं जहां जल की परियाँ ||
'जौली-बोय' की इन लहरों मे
बजती हों जैसे पायलिया  ||

मजहब की दीवार नहीं है
भाषा की तकरार  नहीं है |
एक लहू है, एक तिरंगा
बसता दिलों मे प्यार वही है ||

सारे जहां से सुंदर
'अंडमान' द्वीप हमारा |
सागर मे  मोतियों सा
'निकोबार' द्वीप प्यारा ||


( पोर्ट ब्लेयर मे द्वीप पर्यटन उत्सव के उद्घाटन अवसर पर  इस गीत पर  नृत्य निर्देशिका श्रीमती सी॰ जे ॰ मेरी, अनुराधा गनेशन और जाने माने गायक अविनाश के निर्देशन मे मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया गया )