सपने बुनिए ज़रूर........
ज़िंदगी के जश्न में, डूबिये ज़रूर ,
पर चौखट पे चिराग एक, रखिये ज़रूर !!
मंजिल की तरफ कदम तेज़ हों लेकिन,
गिरते किसी मुसाफिर का, हमसफ़र बनिए ज़रूर !!
बेशक हो चाँद तारो को छूने की ख्वाहिश,
रिश्ता ज़मीन का मगर, याद रखिये ज़रूर !!
आज़ादी क्या है, क्या हैं इसके मायने,
पिंजरे में कैद परिंदे से, कभी पूछिए ज़रूर !!
लगाइए कहकहे, दुनिए के बाज़ार में,
बात कभी दिल से भी, कीजिये ज़रूर !!
ये सच है कि अक्सर वो टूट जाते हैं ,
उम्मीद के धागों से मगर, सपने बुनिए ज़रूर !!
हम रहें न रहें, रह जायेंगे कदमो के निशां ,
दीवार पे लिखी इबारत ये, कभी पढ़िए ज़रूर !!
सुनते हैं वो, बेअसर नहीं होतीं,
दुआओं में अपनी, हमें रखिये ज़रूर !!
ज़िंदगी के जश्न में, डूबिये ज़रूर ,
पर चौखट पे चिराग एक, रखिये ज़रूर !!
मंजिल की तरफ कदम तेज़ हों लेकिन,
गिरते किसी मुसाफिर का, हमसफ़र बनिए ज़रूर !!
बेशक हो चाँद तारो को छूने की ख्वाहिश,
रिश्ता ज़मीन का मगर, याद रखिये ज़रूर !!
आज़ादी क्या है, क्या हैं इसके मायने,
पिंजरे में कैद परिंदे से, कभी पूछिए ज़रूर !!
लगाइए कहकहे, दुनिए के बाज़ार में,
बात कभी दिल से भी, कीजिये ज़रूर !!
ये सच है कि अक्सर वो टूट जाते हैं ,
उम्मीद के धागों से मगर, सपने बुनिए ज़रूर !!
हम रहें न रहें, रह जायेंगे कदमो के निशां ,
दीवार पे लिखी इबारत ये, कभी पढ़िए ज़रूर !!
सुनते हैं वो, बेअसर नहीं होतीं,
दुआओं में अपनी, हमें रखिये ज़रूर !!
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