Monday, March 9, 2015

‘अंडमान दिवस’ 

10 मार्च 1858 को सिमरेमिस नामक जहाज से 200 बंदियों का जत्था ही केवल अंडमान नहीं आया, बल्कि साथ आई त्याग और बलिदान की कभी न भूली जा सकने वाली वो कहानी, जिसके किरदारों ने अपनी तकदीर को इस जमीन से जोड़कर एक नए इतिहास की रचना की |


उनकी पलकों के सपने थके जरूर थे, घायल जरूर थे,पर मरे नहीं थे | क्योंकि वतन की राह पर सब कुछ लुटाने की ख्वाहिश लिए, सर पर कफ़न बांधकर चले उन दीवानों को शायद, तकदीर का हर फैसला मंज़ूर था |

10 मार्च की उस तारीख से आज तक, अंडमान की इस धरती ने 150 वर्षों से भी अधिक समय की लम्बी यात्रा तय की है | यात्रा में धूप-छाँव, बरसात और बसंत के कई मौसम आये, लेकिन यात्रा फिर भी जारी रही |


आज़ादी के उन दीवानों की टोली से बस्ती तक...

और बस्ती से लेकर दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने का हौसला लिए आज के अंडमान तक की ये यात्रा ... आज़ादी, जूनून और ज़िंदगी की कहानी ही बयान करती है |

.... लेकिन ज़रा सुनिए तो.. ये हवा हमसे क्या कहना चाह रही है | आईये चलें..अपनी जड़ों की ओर...महसूस करें उन पलों की गर्माहट को..और अपने कर्म को उस दिशा में मोड़कर इस धरती को बनाये, उनके सपनों का अंडमान |


‘अंडमान दिवस’ की सभी द्वीपवासियों को शुभकामनाएं |




साभार: कार्यक्रम ‘आमने-सामने’,आकाशवाणी,पोर्ट ब्लेयर 

Sunday, January 4, 2015

आखिर आतंकवाद का खूनी खेल कब तक ?

रक्त-रंजित संस्कृति है,
नर पिशाच करते हैं तांडव |

पराकाष्ठा क्षमादान की,
नीलकंठ बन खडा है मानव ||

आखिर..

नर के भेस में, पिशाच की आकृति कब तक |
नियति मान निर्दोष प्राणों की आहुति कब तक |
मानव रक्त की नरभक्षी को स्वीकृति कब तक |
काल के क्रूर पाश में घायल संस्कृति कब तक |


Thursday, January 1, 2015

                                नव वर्ष की सभी दोस्तों को शुभकामनाएं |
करें स्वागत हम नए वर्ष का ||
नया साल दे रहा है दस्तक,

मुस्कान खिल उठी फिर अधरों पर |

भूल कर कडवाहट हम सब 

करें आह्वान फिर उत्कर्ष का ||

करें स्वागत हम नए वर्ष का ||
नए स्वप्न, उम्मीदों को ले फिर,

चले नए सफ़र पर यारों |

हम सब मिल कर करें जो कोशिश,

नामुमकिन कुछ भी नहीं यारों ||

आशा के हम दीप जब दीप जलाकर 

अभिनन्दन हम करें हर्ष का ||

करें स्वागत हम नए वर्ष का ||
भूली ना जा सकेंगी हमसे

बीते वर्ष की सुनहरी यादें |

खुशहाली की चाह में हमने 

किये थे फौलादी वो इरादे ||

पुकारती है मंजिल फिर हमको 

साथ न छोड़े अपने संकल्प का ||

करें स्वागत हम नए वर्ष का ||