Wednesday, January 18, 2012

अन्जान है ज़िंदगी...  
 हर लम्हा, एक नया एहसास है ज़िंदगी ।
धडकनों में बजता, एक साज़ है ज़िंदगी ।।

दुआओं के फूलों से है ज़िंदा, साँसों की सरगम ,
वर्ना हर पल एक नया, इम्तिहान है ज़िंदगी  ।।

ग़मों के साए में मिलेंगे, खुशियों के मोती ,
उम्मीद की अनोखी, मिसाल है ज़िंदगी ।।

मुकाबला इस बार भी जिद्दी मौत से है ,
हार हो या जीत, पर तैयार है ज़िंदगी ।।

ये वो शय नहीं, जो सिर्फ भरती है सिसकियाँ ,
सन्नाटों को चीर दे, वो आवाज़ है ज़िंदगी ।।

सपनो की डोर थामे, बस चलती जाती है ,
सफ़र के अंजाम से पर, अन्जान है ज़िंदगी ।।

उसके पहलू में बिखरेंगे, सुकून के कुछ पल ,
मासूम चाहतों की, गिरती दीवार है ज़िंदगी ।।

खामोशियों की जुबां, वो समझ न पाए कभी,
और मजबूरियों से अपनी, लाचार है ज़िंदगी ।।

गुज़र जाती है, एक उम्र इसे ढूँढ़ते ,
कभी न हो जो पूरी, वो तलाश है ज़िंदगी ।।

होगी दूर कभी न कभी, ये दिलों की दूरियां,
अंधेरों में जलता, चिराग है ज़िंदगी ।।

खुली  रहेंगीं मरकर भी, मेरी ऑंखें अशोक ,
कभी न  हो जो ख़त्म, वो इंतज़ार है ज़िंदगी ।।

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