15 अगस्त .........
आजादी को कर के सलाम
चलो दोस्त करें कुछ काम ।
पोंछ दें उन चेहरों से आँसू
खो गई है जिनकी मुस्कान ।।
नफरतों के सैलाब में
उजड़ गईं हैं जो बस्तियाँ ।
प्यार की गंगा वहाँ बहाएँ
मिटाएँ दिलों के बीच दूरियाँ ।।
चलो ढूँढ लायें फिर उसे ,
वो ज़िंदगी.. जो हुई गुमनाम ।।
पोंछ दें उन चेहरों से आँसू
खो गई है जिनकी मुस्कान ।।
मासूम नौनिहालों को
लौटा दें वो बचपन ।
मन की तरुणाई पर
फिर बरसे वही सावन ।।
रूठी बहारों को मना कर
ले आएँ वही सुबह,फिर वही शाम ।।
पोंछ दें उन चेहरों से आँसू
खो गई है जिनकी मुस्कान ।।
आज़ादी का ये जश्न
आज कुछ अधूरा सा है ।
मन का हर कोना
आज कुछ सूना सा है ।।
दुआएँ देता है तिरंगा उसे
जिस पर बसते हैं मेरे प्राण ।।
आजादी को कर के सलाम
चलो दोस्त करें कुछ काम ।
पोंछ दें उन चेहरों से आँसू
खो गई है जिनकी मुस्कान ।।
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