Friday, July 5, 2013

सरफिरा कह दिया...

दिल को अच्छे लगे दिलरुबा कह दिया |
क्या बुरा कर दिया, क्या बुरा कह दिया ||

हमसे सजदे की उम्मीद करते हैं वो,
जिनको भूले से हमने खुदा कह दिया ||

सरफरोशी की जब-जब भी की आरज़ू,
दोस्तों ने हमें सरफिरा कह दिया ||

जिसको देखो वही हमसे नाराज़ है,
तुमने लोगों से महफ़िल में क्या कह दिया ||

आप से ऐसी उम्मीद कब थी मयंक
आप ने भी हमें बेवफा कह दिया ||


                              शायर : के.के.सिंह ‘मयंक’



अजब कहानी है....

 इस ज़िंदगी की भी क्या  अजब कहानी है ।
 दिल में दर्द और आँखों में सिर्फ पानी है ।।

अपने प्यार को  हम खुदा मान बैठे
लोग हँसते गए कि ये कैसी नादानी है ।।

मर कर भी मुझसे कभी जुदा न होगी,
दी उसने जो, प्यार की निशानी है ।।

दबे पाँव आती है वो अपना फरमान लेकर
सिकंदर भी हारा उससे, जो मौत अनजानी है ।।

उसके हर सितम,मेरे नसीब के उजाले हैं,
इश्क में मिली हर चीज़,खुदा की मेहरबानी है।।

धड़का न जिसका दिल कभी किसी के लिए,
यारों, समझो बेकार वो जवानी है ||


हो नाम तेरे,मेरे हिस्से की सारी खुशियाँ
  उठे हाथों में आज भी,वही दुआ पुरानी है ।।


Monday, July 1, 2013

बेखुदी में ये दिल जलता था....

रात और दिन का ये सफ़र चलता था, चलता रहेगा |
बेखुदी में ये दिल जलता था, जलता रहेगा ||

तनहाई की वादियों में, घुटता है दिल,
यादों के सहारे है, ज़िंदा हर एक पल |

क्या फिर हुआ है खून सपनो का,
दिल इस खौफ से डरता था,डरता रहेगा ||

दुनिया के शोर में ढूंढता हूँ खामोशियां |
जहां मिले सुकून,कहाँ गयीं वो बस्तियां ||

हुए गुमशुदा सब, पलते जो ख्व्वाब थे,
दिल उनकी तलाश में भटकता था, भटकता रहेगा ||
                    
आखिर जीत होगी अपनी, कभी ये विश्वास था |
खिलेगे फूल गुलशन में, कभी ये अरमान था ||

खुदा से अपने, दुआएं थी कभी माँगी
उसके इंतज़ार में तड़पता था दिल, तड़पता रहेगा ||

रात और दिन का ये सफ़र चलता था, चलता रहेगा |
बेखुदी में ये दिल जलता था, जलता रहेगा ||