Monday, July 1, 2013

बेखुदी में ये दिल जलता था....

रात और दिन का ये सफ़र चलता था, चलता रहेगा |
बेखुदी में ये दिल जलता था, जलता रहेगा ||

तनहाई की वादियों में, घुटता है दिल,
यादों के सहारे है, ज़िंदा हर एक पल |

क्या फिर हुआ है खून सपनो का,
दिल इस खौफ से डरता था,डरता रहेगा ||

दुनिया के शोर में ढूंढता हूँ खामोशियां |
जहां मिले सुकून,कहाँ गयीं वो बस्तियां ||

हुए गुमशुदा सब, पलते जो ख्व्वाब थे,
दिल उनकी तलाश में भटकता था, भटकता रहेगा ||
                    
आखिर जीत होगी अपनी, कभी ये विश्वास था |
खिलेगे फूल गुलशन में, कभी ये अरमान था ||

खुदा से अपने, दुआएं थी कभी माँगी
उसके इंतज़ार में तड़पता था दिल, तड़पता रहेगा ||

रात और दिन का ये सफ़र चलता था, चलता रहेगा |
बेखुदी में ये दिल जलता था, जलता रहेगा ||








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