भूतपूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी की पुण्य तिथि
पर
छलक उठे नयन, भीग गया मन ,
याद आयी फिर हमको, तेरी कुर्बानी |
बलिदानों की तेरी अमर कहानी,
भूल नहीं सकते हम हिन्दुस्तानी ||
वीर जवाहर का तू गौरव
बापू की थी आँखों का तारा |
इंदु से जब बनी तू इंदिरा
छा गया जग में देश हमारा |
देके लहू तुमने ही सिखाया,
देश में मरना ही जिंदगानी ||
रंग बिरंगे फूलों का ये,
अपना वतन है एक गुलिस्ताँ |
पहले हम हैं भारतवासी
चाहे हिन्दू हों या मुसलमां ||
सच करना है तेरे सपने
अब हमने ये मन में ठानी ||
No comments:
Post a Comment