Wednesday, April 27, 2016

आहिस्ता आहिस्ता पहचान खोने लगते है एहसास ।
मगर ये जानते हैं वो कि कभी नही मरते हैं एहसास।।

उठती जरूर है जिंदगी में वक्त की आंधी।
मगर जीने की तमन्ना नही छोड़ते हैं एहसास।।

इनके साथ होता है जिंदगी भर का नाता।
आखरी सांस तक भी नही बिछड़ते हैं एहसास।।

लफ्जों का जब वो घोंटते हैं गला।
खामोशियों में तब सिसकियाँ भरते हैं एहसास।।

समझते है वो कि कर लिया खुद को जुदा।
नादानी पर उनकी, हँसते हैं एहसास।।

जख्म उधर हो या इधर, बात एक है।
क्योंकि दर्द की हर टीस पर सिहर उठते हैं एहसास।।

सरहदें खींच दो बेशक हमारे दरम्यान।
डोर दिलो की टूटती नही, कहते हैं एहसास।।

जाने क्या खो सा गया है।
तलाश में जिसकी, भटकते हैं एहसास।।

न कोई राह है, न मंजिल और न ठिकाना।
जाने किस सफर में, निकलते हैं एहसास।।

हो न मायूस, देख उनकी संगदिली ‘अशोक‘।
पत्थर दिल में भी लहू बन कर दौड़ते हैं एहसास।।

Wednesday, January 27, 2016

गुमनाम एहसास उनके, लौटेंगे कभी।

ज़मीर धिक्कारेगा तब, सोचेंगे कभी।।


औकात भूलकर, बने बैठे हैं खुदा,
जाना है चार कंधो पर, ये सच मानेंगे कभी।।



जो समझते हैं, खुद को शहंशाह,
छिन जाएगा ये ताज, तब पछताएंगे कभी।।



बेशक आज मुझे भूल जाएं वो,
पर यादों के जुगनू टिमटिमाएंगे कभी।।



क्या जुर्म किया, जो भुगते सज़ा,
वक्त आने पर ये सवाल पूछेंगे कभी।।



चल दिए आखिर, वो अपने सफर पर,
लेकिन मुड़कर रास्ते पर, हमें देखेंगे कभी।।



ये दिल है, कोई खिलौना नहीं,
एक दिन वे ये महसूस करेंगे कभी।। 



मायूस न हो, खुदगर्ज दुनिया में अशोक,
कुछ हाथ दुआओं के उठेंगे कभी।।

Friday, January 8, 2016


लेता है वक्त, हर शख्स का इम्तहान।

बच नही सकता इससे, कोई भी इंसान।।



हम महफूज हैं, सुकून-ए-अमन की फिजा में,
क्योंकि सरहद पर लुटाते हैं,  फौजी अपनी जान।।



होशो-हवास खोकर, दीवाने सी हुई उनकी हालत,
वतन की तकदीर लिखते थे जो, बनकर हुक्मरान।।



कुदरत भी अब, बदलने लगी है चेहरे,
ये हुनर भी इसे, आखिर सिखा गया इंसान।।



जमीर-ईमान, सब कुछ बिकता है यहाँ,
आदमी बन गया है, चलती फिरती दुकान।।



सुनते थे दोस्ती में, बसता है खुदा,
 बदलते वक्त में मगर, गुम हुई वो पहचान।।



तुझको पाने की हसरत, निकलेगी न दिल से,
तू चाहे जितना जोर लगा, या ले ले मेरी जान।।



बिछड़े दिल, क्या मिल पाते हैं कभी,
यक़ी नही होता सुनकर तेरी दास्तान।।



उन खुबसूरत एहसासों के नाम, कर दी जिंदगी हमने,
ऐ मौत तुझे दूँ मैं क्या, नही बचा अब कोई सामान।।



सह लेगा ‘अशोक‘ हर दर्द, गर  है तू उसके साथ,
टपकेंगे अश्क बेशक, पर बोलेगी सच ये जुबान।।