Friday, February 17, 2012

जीवन की मुस्कान समर्पित...


जीवन की मुस्कान समर्पित ........                                                                       
 उस मासूम को
जिसकी मुस्कान में 
अपनी ज़िंदगी को
मुस्कुराते  देखा

सुख-दुःख की आँख मिचौली में 
आस की एक बाती हरदम
जगमगाते देखा ....   

वक़्त के उस दौर को
जब बिखरे हुए 
ज़िंदगी के रास्ते
मुड़कर
उस और हो चले
जिधर
उस मासूम के कदमो को 
बढ़ते देखा.........

उन स्याह रातों को
जब
आकाश को
एकटक तकती आँखों में   
सपनो की बारात  को उतरते देखा.......

ज़िंदगी के उन पलों को 
जब
खुशी और गम के मायनों को
एक मुस्कान में सिमटते देखा.....

उन लम्हों को 
जिनमे 
सपनो को पंख लगाए 
दूर.....गगन में
उड़ते देखा......

उस तमन्ना को
जब
मुट्ठी भर आसमान की चाहत में
हाथो की लकीरों को
बनते और बिगड़ते देखा.......

उन दुआओं को
जिनकी बुनियाद पर बनी राहों को
मंजिल से
मिलते देखा....

उस माँ को 
जिसकी
ममता की छाया में
आकाश के विस्तार को
झुकते देखा......      

तिनका-तिनका जोड़कर 
बने यादों के उस घरौंदे को
जिसमे
ज़िंदगी को कभी 
बसर करते देखा......

उस खामोशी को
गिरफ्त में जिसकी
आवाजों को 
दम तोड़ते देखा..... 

और समर्पित उसको....
जो हर वक़्त  है मेरे साथ-साथ..
ज़िंदगी की धूप में..
गम के साए में..
आस्था के उजियारे में..
दुआओं में..
संवेदनाओं में..

और आज फिर
 उसकी याद में 
इन पलकों को 
भीगते देखा.....

 

  

1 comment:

  1. sir ji,

    Excellent poem. These lines contains all the colourful emotions of life.

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