Saturday, February 4, 2012

आ जाते जो तुम एक बार... 

आ जाते जो तुम एक बार,
जी उठता मेरा संसार ।।

जाने कितने मतवालों ने, 
अपना खून बहाया था ।
तुम जैसे कितने लालों ने, 
माता को शीश  चढ़ाया  था  ।।
नहीं भूलता  महाकाल भी,
सत्तावन  की  वो  तलवार  ।।   
 आ जाते जो तुम एक बार... 
                                            
 सरफरोशी  के  जूनून  में , 
निकल  पड़े तुम बीच  समर  में ।
माटी  का  है  क़र्ज़  चुकाना , 
ठान  लिया  जो तुमने  मन  में ।। 
काँप उठा सुनकर बैरी फिर, 
छेड़ी  जो तुमने हुंकार ।।
 आ जाते जो तुम एक बार...

सत्य अहिंसा की लाठी ले,
छेड़ दिया तुमने संग्राम ।
सत्याग्रह का मंत्र जो गूंजा ,
चारों ओर मचा कोहराम ।।
भाग चला फिर दुश्मन  रण से, 
सुनकर तेरी वो ललकार ।।
 आ जाते जो तुम एक बार...

रंग बसन्ती की धारा में,
भीगा मन मेरा भी रिमझिम।
तारो  की बिखरी अंगनाई, 
जाग उठे हैं सपने झिलमिल ।। 
सुन ओ प्यारी पिया बसन्ती, 
मन की तरुणाई करे पुकार ।।
 आ जाते जो तुम एक बार...

जब से गए हो सब नीरस है,
सूना है अपना घर  आँगन ।
 सुख-दुःख के हर पलछिन में,
तुम्हे ही दूंढता मेरा जीवन ।।
जीना है तो जी ही लेंगे पर,
नहीं सूखती अश्रुधार ।।   
 आ जाते जो तुम एक बार...

दुनिया है ये एक सराय,
चार दिनों का है ये डेरा।
उड़ जाएगा पंछी एक दिन,
छोड़ के प्यारे रैन बसेरा ।।
                                                            हुए हो क्यों तुम, गुम फिर ऐसे,
छू कर मेरे मन के तार ।। 
आ जाते जो तुम एक बार ।
 जी उठता मेरा संसार ।। 

No comments:

Post a Comment