Monday, September 28, 2020

जय सियाराम 5

 समुद्र पर पुल बनकर तैयार हो गया । असंभव समझा जाने वाला कार्य संभव हो गया । भगवान शंकर उमा से कहते हैं- 

महिमा यह न जलधि कइ बरनी ।

पाहन गुन न कपिन्ह कइ करनी ।

श्री रघुवीर प्रताप तें सिंधु तरे पाषान ।

ते मतिमंद जे राम तजि भजहिं जाइ प्रभु आन ।।

" जो पत्थर स्वयं डूबते हैं  और दूसरों को डुबोते हैं, वे ही जहाज के  समान प्रभु की कृपा से स्वयं तैरने वाले और दूसरो को पार ले जाने वाले हो गए । यहाँ  न तो समुद्र की महिमा वर्णित की गई  है, न ही पत्थरों  का गुण है और न ही वानरों  की करामात है ।

प्रभु  श्री राम की कृपा से सब संभव है। "

सकल सुमंगल दायक रघुनायक गुन गान ।

सादर सुनहिं ते तरहिं भव सिंधु बिना जलजान ।।

" श्री रघुनाथजी का गुणगान संपूर्ण सुन्दर मंगलों का देने वाला है। जो उसे आदरसहित सुनेंगे, वे बिना किसी साधन के ही भवसागर तर जाएंगे ।

माता सीता  से अजर अमर होने का आशीर्वाद पाने वाले, जन जन का मंगल करने वाले, संकट मोचन हनुमान स्वामी महाराज हम पर कृपा करें और हम राम नाम के काढे से अपने मन मस्तिष्क और शरीर को सैनिटाइज कर विकारों को दूर करें, जीवन सार्थक करें  । 

🌹सियावर रामचंद्र की जय 🌹

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