Monday, September 28, 2020

जय सियाराम 2

 जात पवनसुत देवन्ह देखा ।

जानैं कहुँ बल बुद्धि बिसेषा ।।

सुरसा नाम अहिन्ह कै माता ।

पठइन्हि आइ कही तेहिं बाता ।।

अपने लक्ष्य की ओर चले हनुमानजी को देखकर देवताओं ने सोचा-

 हनुमानजी  बल और विद्या की परीक्षा मे तो कई बार अपनी प्रतिभा का परिचय दे चुके हैं, लेकिन राक्षसों के बीच जाकर  सकुशल लौट आने की बुद्धि इनमे है या नही, यह बात जान लेना चाहिए । 

परीक्षा लेने के लिए उन्होंने दक्षपुत्री नागमाता सुरसा को भेजा ।

आज सुरन्ह मोहि दीन्ह आहारा ।

सुनत बचन कह पवनकुमारा ।।

राम काजु करि फिरि मैं आवौं ।

सीता कइ सुधि प्रभुहि सुनावौं ।।

तब तव बदन पैठिहउं आई ।

सत्य बचन मोहि जान दे माई ।।

सुरसा ने कहा कि "आज मुझे प्रारब्धवश भोजन मिला है, मै पेट भर खाऊँगी" । 

इस पर हनुमानजी ने कहा कि " मुझे श्री राम जी का कार्य पूरा कर आने दो, फिर खा लेना । हे माता ! मै सत्य कह रहा हूँ । मै अवश्य आउंगा, तब मुझे खा लेना । मै मृत्यु से नही डरता । मुझे अभी राम काज के लिए जाने दो ।"

अपना जीवन राम काज मे समर्पित करने वाले, भक्ति और आत्म विश्वास की प्रतिमूर्ति भगवान

मंगलमूर्ति  हनुमान स्वामी महाराज आपका मंगल करें, कष्ट हरें । आपको अपने लक्ष्य तक पहुंचने मे सक्षम बनाएं ... 👏

No comments:

Post a Comment