Monday, September 28, 2020

जय सियाराम 10

 हर कोदंड कठिन जेहिं भंजा ।

तेहि समेत नृप दल मद गंजा ।

बंदी बनकर राज्य सभा में आए हनुमानजी ने रावण को स्मरण कराते हुए कहा-  " हे रावण ! राजा जनक के धनुष यज्ञ में जो   धनुष बडे बडे राजाओं से हिल भी न सका था, उसे तिनके की भांति तोड देने वाले श्री राम को तुम भूल गए !"

खर दूषन त्रिसिरा अरू बाली ।

बधे सकल अतुलित बलसाली ।

जाके बल लवलेस तें, जितेहु चराचर झारि 

तासु दूत मैं जा करि हरि आनेहु प्रिय नारि ।।

"खर, दूषण, त्रिशिरा जैसे राक्षसों का उनकी चौदह सेना के साथ अकेले संहार करने वाले श्री राम को क्या तुम नहीं जानते ! 

तुम्हे अपनी कांख में दबाकर रखने वाले बालि को जिन्होंने एक ही बाण से मार डाला !

रावण ! उनके बाणों से लंका का विध्वंस हो जाएगा ।"

अपनी निर्भीक वाणी से  शत्रु पक्ष के मनोबल का पतन कर राजनीतिक  कुशलता का परिचय देने वाले अतुलित बल-बुद्धि के धनी हनुमान स्वामी महाराज आपके दुख हरें, प्रभु श्री राम की भक्ति का आशीर्वाद देकर आपका जीवन सफल करें, आपको अभयदान दें ।

🌷सियावर रामचंद्र की जय 🌷

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