बंदी बनकर सभा में आए हनुमानजी ने रावण को सन्मार्ग दिखाते हुए समझाने का भरसक प्रयास किया:
राम चरन पंकज उर आनहु ।
लंका अचल राजु तुम्ह करहु ।।
" रावण ! तुम बडे कुलीन हो । तुम्हारे पास अचल सम्पत्ति है, तुम बडे विद्वान हो और बलशाली हो । इन्हें पाकर अभिमान मत करो । भगवान श्री राम की शरण में चलो। वे तुम्हें क्षमा कर देंगे ।"
पवनपुत्र ने ये सत्य भी सामने रखा:
सुन दसकंठ कहउं पन रोपी ।
बिमुख राम त्राता नहिं कोपी ।।
"श्री राम से बिमुख होने पर इस ब्रह्माण्ड में कोई तुम्हारी रक्षा नही कर सकता ।"
भौतिक बाहुबल, सम्पत्ति, और कथित भौतिक विद्वता के नशे में चूर हम सभी पृथ्वी लोक वासियों को भगवान शिव के अंशावतार हनुमान स्वामी महाराज सन्मार्ग दिखाएँ, प्रभु श्री राम की भक्ति का प्रसाद दें, हमारे मनुष्य जीवन को सार्थक करें ।
🌷सियावर रामचंद्र की जय 🌷
(घर पर रहें-सुरक्षित रहें )
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