Monday, September 28, 2020

जय सियाराम 9

 जाकें डर अति काल डेराई ।

जो सुर असुर चराचर खाई ।।

तासों बयरू कबहुँ नहिं कीजै ।

मोरे कहें जानकी दीजै ।। 

बंदी बनकर राज्य सभा में आने पर हनुमानजी ने रावण को समझाने का प्रयास करते हुए कहा-

 " रावण ! जो काल सारी दुनिया को निगल जाता है, वह काल भी उनसे (प्रभु श्री राम से) भयभीत रहता है, उनके अधीन रहता है । उनसे बैर करके तुम बच नही सकते ।"

प्ननतपाल रघुनायक करूणा सिंधु खरारि ।

गएँ सरन प्रभु राखिहैं तव अपराध बिसारि ।।

" तुम अपनी भूल सुधार कर प्रभु श्री राम की शरण में जाओ । वे तुम्हें क्षमा कर देंगे । वे शरणागत के सारे अपराध भूल जाते हैं ।इसी में तुम्हारा कल्याण है।"

अहंकार के वश में चूर रावण को, समस्त जगत के स्वामी प्रभु श्री राम की अपार शक्ति का बोध कराकर उनकी शरण में जाकर अपने जीवन को सार्थक करने का सन्मार्ग दिखाने वाले श्री हनुमान स्वामी महाराज आपको भी अहंकार, काम, क्रोध, लोभ, मोह के जाल से निकाल कर प्रभु श्री राम की भक्ति का आशीर्वाद दें, आपका जीवन सफल करें ।

🌷सियावर रामचंद्र की जय 🌷

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