Thursday, May 4, 2023

जन्म दिन-रिद्धि-4मई2023

जन्म दिन की शुभकामनाएं रिद्धि ।

मिलें खुशियाँ, पूरीं हो आशाएँ रिद्धि ।।


खिली रहे मुस्कान तुम्हारी, 

मासूम चाहते, हों सब पूरी ।

बना रहे आशीर्वाद बडों का,

रहे न कोई कामना अधूरी ।।

बढती जाना जीवन पथ पर तुम,

होगी हर संकल्प की सिद्धि  ।।

जन्म दिन की शुभकामनाएं रिद्धि ।


जीना, बचपन को जी भर तुम,

जीवन के ये दिन होते निराले ।

न होता दुनिया का कोई दुख,

केवल होते होठों पर उजाले ।।

होते हैं ये पल-छिन अनमोल ; 

ये मधुर यादें ही होतीं, 

जीवन की असल उपलब्धि ।।

जन्म दिन की शुभकामनाएं रिद्धि ।


पढ लिख कर होशियार तुम बनना, 

ज्ञन-कर्म से अपने तुम

घर संसार को रोशन करना ।

संबल बने महादेव तुम्हारे,

हो सतत् आस्था में वृद्धि  ।

जन्म दिन की शुभकामनाएं रिद्धि ।

मिलें खुशियाँ, पूरीं हों आशाएं रिद्धि ।।







Friday, April 15, 2022

पोइला बोइशाख-डिगलीपुर-15 अप्रैल 2022

' जीवन में फिर ये नव वर्ष.. '

बिखरे तिनके फिर बटोर कर,
नीड का फिर निर्माण करें ।

प्राण फूंक इन हौसलों में हम,
इरादों को फौलाद करें ।।

आह्वान यही है लेकर आया,
जीवन में फिर ये नव वर्ष ।।


भूल कर कडवाहट सारी,
रिश्तों में फिर नई जान भरें ।

पल दो पल का साथ हमारा,
क्यों न इसको यादगार करें ।।

समेट कर इन सब पल छिन को,
जीवन को दें हम नव-उत्कर्ष ।।


कभी हैं खुशियाँ, कभी हैं आंसू,
जिंदगी के हैं, रंग निराले ।

नियति, सब ये है खेल खिलाती,
कुछ नही है बस में आज हमारे ।।

इम्तिहान चाहे जो ले लो,
हैं, हर पल हम तैयार सहर्ष ।।

जीवन में फिर ये नव वर्ष…



' पोइला बोइशाख ' और ' विशु'  की हार्दिक शुभकामनाएं..💐

Monday, September 28, 2020

जय सियाराम 10

 हर कोदंड कठिन जेहिं भंजा ।

तेहि समेत नृप दल मद गंजा ।

बंदी बनकर राज्य सभा में आए हनुमानजी ने रावण को स्मरण कराते हुए कहा-  " हे रावण ! राजा जनक के धनुष यज्ञ में जो   धनुष बडे बडे राजाओं से हिल भी न सका था, उसे तिनके की भांति तोड देने वाले श्री राम को तुम भूल गए !"

खर दूषन त्रिसिरा अरू बाली ।

बधे सकल अतुलित बलसाली ।

जाके बल लवलेस तें, जितेहु चराचर झारि 

तासु दूत मैं जा करि हरि आनेहु प्रिय नारि ।।

"खर, दूषण, त्रिशिरा जैसे राक्षसों का उनकी चौदह सेना के साथ अकेले संहार करने वाले श्री राम को क्या तुम नहीं जानते ! 

तुम्हे अपनी कांख में दबाकर रखने वाले बालि को जिन्होंने एक ही बाण से मार डाला !

रावण ! उनके बाणों से लंका का विध्वंस हो जाएगा ।"

अपनी निर्भीक वाणी से  शत्रु पक्ष के मनोबल का पतन कर राजनीतिक  कुशलता का परिचय देने वाले अतुलित बल-बुद्धि के धनी हनुमान स्वामी महाराज आपके दुख हरें, प्रभु श्री राम की भक्ति का आशीर्वाद देकर आपका जीवन सफल करें, आपको अभयदान दें ।

🌷सियावर रामचंद्र की जय 🌷

जय सियाराम 9

 जाकें डर अति काल डेराई ।

जो सुर असुर चराचर खाई ।।

तासों बयरू कबहुँ नहिं कीजै ।

मोरे कहें जानकी दीजै ।। 

बंदी बनकर राज्य सभा में आने पर हनुमानजी ने रावण को समझाने का प्रयास करते हुए कहा-

 " रावण ! जो काल सारी दुनिया को निगल जाता है, वह काल भी उनसे (प्रभु श्री राम से) भयभीत रहता है, उनके अधीन रहता है । उनसे बैर करके तुम बच नही सकते ।"

प्ननतपाल रघुनायक करूणा सिंधु खरारि ।

गएँ सरन प्रभु राखिहैं तव अपराध बिसारि ।।

" तुम अपनी भूल सुधार कर प्रभु श्री राम की शरण में जाओ । वे तुम्हें क्षमा कर देंगे । वे शरणागत के सारे अपराध भूल जाते हैं ।इसी में तुम्हारा कल्याण है।"

अहंकार के वश में चूर रावण को, समस्त जगत के स्वामी प्रभु श्री राम की अपार शक्ति का बोध कराकर उनकी शरण में जाकर अपने जीवन को सार्थक करने का सन्मार्ग दिखाने वाले श्री हनुमान स्वामी महाराज आपको भी अहंकार, काम, क्रोध, लोभ, मोह के जाल से निकाल कर प्रभु श्री राम की भक्ति का आशीर्वाद दें, आपका जीवन सफल करें ।

🌷सियावर रामचंद्र की जय 🌷

जय सियाराम 8

 बंदी बनकर सभा में आए हनुमानजी ने रावण को सन्मार्ग दिखाते हुए समझाने का भरसक प्रयास किया: 

राम चरन पंकज उर आनहु ।

लंका अचल राजु तुम्ह करहु ।।

" रावण ! तुम बडे कुलीन हो । तुम्हारे पास अचल सम्पत्ति है, तुम बडे विद्वान हो और बलशाली हो । इन्हें पाकर अभिमान   मत करो । भगवान श्री राम की शरण में चलो। वे तुम्हें क्षमा कर देंगे ।"

पवनपुत्र ने ये सत्य भी सामने रखा:

सुन दसकंठ कहउं पन रोपी ।

बिमुख राम त्राता नहिं कोपी ।।

"श्री राम से बिमुख होने पर इस ब्रह्माण्ड में कोई तुम्हारी रक्षा नही कर सकता ।"

भौतिक बाहुबल, सम्पत्ति, और कथित भौतिक  विद्वता के नशे में चूर हम सभी पृथ्वी लोक वासियों को भगवान शिव के अंशावतार हनुमान स्वामी महाराज सन्मार्ग दिखाएँ, प्रभु श्री राम की भक्ति का प्रसाद दें, हमारे मनुष्य जीवन को सार्थक करें ।

 🌷सियावर रामचंद्र की जय 🌷

    (घर पर रहें-सुरक्षित रहें )

जय सियाराम 7

 श्री हनुमानजी ने अहंकारी रावण के समक्ष प्रभु श्री राम की शक्ति और भक्ति का वर्णन करते हुए उसे प्रभु की शरण मे जाने का आग्रह किया । लेकिन रावण ने उपहास कर, खीझते हुए उन्हें मारने का आदेश दिया । विभीषण ने आपत्ति जताई कि दूत को मारना नीति विरोध है और फिर अंत में रावण ने पूंछ जलाने की आज्ञा दी ।

 सुनकर हनुमानजी मुस्कुराए और गोस्वामी तुलसीदास ने इस दृश्य का वर्णन कुछ इस प्रकार किया है :

बचन सुनत कपि मन मुस्काना ।

भइ सहाय सारद मैं जाना ।

रहा न नगर बसन घृत तेला ।

बाढी पूंछ कीन्ह कपि खेला ।।

हनुमानजी ने पूंछ इतनी बढा दी कि लंका में कपडा और घी या तेल बचा ही नही । पूंछ मे आग लगा दी गई और राक्षस उन्हें नगर में घुमाने लगे, बच्चे ताली पीटकर हंसने लगे । हनुमानजी ने यही सही अवसर समझा और फिर उछलकर एक महल से दूसरे महल पर जाकर उन्हे भस्म करने लगे । राक्षस प्राण बचाकर भागने लगे ।

हरि प्रेरित तेहि अवसर, चले मरूत उनचास ।

अट्टहास करि गर्जा कपि बढि लाग अकास ।।

 सारी लंका धू धू कर जलने लगी ।

उलटि पलटि लंका सब जारि ।

कूदि परा पुनि सिंधु मझारि ।।

प्रभु श्री राम की भक्ति से विमुख करने वाली हमारे चित्त की सारी नकारात्मक वृत्तियों को भस्म कर, ह्रदय  के सिंहासन पर श्री राम को विराजमान कर, पवनपुत्र हनुमानजी हमारा उद्घार करें..हमारे मन से कभी श्री राम का वनवास न हो..यह जीवन उनके चरणों में समर्पित हो, ऐसा वरदान दें..

🌷सियावर रामचंद्र की जय 🌷

जय सियाराम 6

 हनुमानजी ने,प्रभु श्री राम को लंका दहन और सीता मैया की खोज का पूरा वृत्तांत सुनाया। सुनकर प्रभु राम ने भावाकुल होकर कहा कि" संसार में तुम्हारे समान उपकारी कोई नही है। इसके बदले मैं तुम्हें क्या दे सकता हूँ! मै तो तुम्हारे सम्मुख देख भी नही सकता ।" गोस्वामी तुलसीदास लिखते हैं:  ब्रह्माण्ड के स्वामी के मुख से यह सुनकर हनुमानजी,

सुनि प्रभु बचन बिलोकि मुख, गात हरषि हनुमंत 

चरण परेउ प्रेमाकुल, त्राहि त्राहि भगवंत ।।

व्याकुल होकर उनके चरणों में गिर पडे और प्रेम मग्न हो गए । प्रभु श्री राम ने बलात् उन्हें उठाकर ह्रदय से लगाया और अनन्य भक्ति का वरदान दिया। 

प्रभु राम ने पूछा कि हनुमान तुमने कैसे रावण की मजबूत सुरक्षित लंका में घुसकर उसका दहन किया? यह सुनकर हनुमानजी ने अभिमान रहित वचन कहे: 

साखामृग कै बडि मनुसाई ।

साखा तें साखा पर जाई।।

नाहि सिंधु हाटकपुर जारा ।

निसिचर गन बधि बिपिन उजारा ।।

सो सब तव प्रताप रघुराई ।

नाथ न कछु मोरि प्रभुताई ।।

" वानर का स्वभाव तो केवल एक डाल से दूसरी डाल तक कूदना भर है। समुद्र लांघ कर सोने का नगर जलाना तथा राक्षसों को मारकर अशोक वन को उजाडना, यह सब तो आपका ही प्रताप है। इसमे मेरी कुछ प्रभुता नही है। प्रभु जिस पर आप प्रसन्न हों, उसके लिए कुछ भी अगम नही है।"

हनुमानजी ने आगे कहा:

नाथ भगति अति सुखदायनी ।

देहु कृपा करि अनपायनी।।

"हनुमानजी ने प्रभु से निश्छल भक्ति मांगी ।"

और भगवान ने 

"सुनि कपि परम सरल कपि बानि।

एवमस्तु तब कहेउ भवानी ।।"

सहर्ष 'एवमस्तु ' कहा ।

अपने सम्पूर्ण पुरुषार्थ के फल का श्रेय विनीत भाव से प्रभु श्री राम को देने वाले, निरंतर राम भक्ति मे लीन रहकर सबका कल्याण करने वाले, अयोध्या के हनुमान गढी के राजा संकट मोचन स्वामी हमें  विपत्तियों से पार पाने का संबल प्रदान करें, राम नाम के रसायन से  सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें, यही याचना करते हैं ।

🌷सियावर रामचंद्र की जय 🌷

जय सियाराम 5

 समुद्र पर पुल बनकर तैयार हो गया । असंभव समझा जाने वाला कार्य संभव हो गया । भगवान शंकर उमा से कहते हैं- 

महिमा यह न जलधि कइ बरनी ।

पाहन गुन न कपिन्ह कइ करनी ।

श्री रघुवीर प्रताप तें सिंधु तरे पाषान ।

ते मतिमंद जे राम तजि भजहिं जाइ प्रभु आन ।।

" जो पत्थर स्वयं डूबते हैं  और दूसरों को डुबोते हैं, वे ही जहाज के  समान प्रभु की कृपा से स्वयं तैरने वाले और दूसरो को पार ले जाने वाले हो गए । यहाँ  न तो समुद्र की महिमा वर्णित की गई  है, न ही पत्थरों  का गुण है और न ही वानरों  की करामात है ।

प्रभु  श्री राम की कृपा से सब संभव है। "

सकल सुमंगल दायक रघुनायक गुन गान ।

सादर सुनहिं ते तरहिं भव सिंधु बिना जलजान ।।

" श्री रघुनाथजी का गुणगान संपूर्ण सुन्दर मंगलों का देने वाला है। जो उसे आदरसहित सुनेंगे, वे बिना किसी साधन के ही भवसागर तर जाएंगे ।

माता सीता  से अजर अमर होने का आशीर्वाद पाने वाले, जन जन का मंगल करने वाले, संकट मोचन हनुमान स्वामी महाराज हम पर कृपा करें और हम राम नाम के काढे से अपने मन मस्तिष्क और शरीर को सैनिटाइज कर विकारों को दूर करें, जीवन सार्थक करें  । 

🌹सियावर रामचंद्र की जय 🌹

जय सियाराम 4

 प्रभु श्री राम के क्रोध से भयभीत हो समुद्र ने हाथ जोडकर अनुनय विनय करते हुए कहा-

प्रभु प्रताप मैं जाब सुखाई  ।

उतरिहि कटकु न मोरि बडाई ।।

प्रभु अग्या अपेल श्रुति गाई ।

करौं सो बेगि जो तुम्हहि सोहाई ।।

" आपका अग्नि बाण तो समुद्र को सोख देगा । मैं सूख जाऊँगा, लेकिन मर्यादा नही रहेगी । तथापि प्रभु जैसा चाहते हैं, वैसा ही होता है, ऐसा वेद गाते हैं । अब आपको जो अच्छा लगे, मैं वही करूँ । "

समुद्र से ऐसे नम्रता भरे वचन सुनकर प्रभु ने समुद्र से ही उपाय पूछा तो समुद्र ने कहा कि-

नाथ नील नल कपि द्वौ भाई ।

लरिकाई रिषि आसिष पाई ।।

तिन्ह के परस किएं गिरि भारे ।

तरिहहिं जलधि प्रताप तुम्हारे ।।

"आपकी सेना में नल व नील दो ऐसे बंदर हैं,  जिनके स्पर्श करने पर ऋषि के आशीर्वाद से बडे बडे पत्थर भी तैरने लगेंगे ।"

 प्रभु श्री राम के हर प्रकल्प में साथ रहने को अपना परम सौभाग्य समझने वाले, दीन दुखियों के कष्ट हरने वाले, वर्तमान में अयोध्या के राज पालक हनुमान स्वामी महाराज आपकी मनोकामनाएँ पूरी करें ।

🌷 जय सियाराम 🌷

जय सियाराम 3

 प्रभु श्री राम जी समुद्र तट  बैठे हुए समुद्र से उस पार जाने हेतु रास्ता मांग रहे हैं । अनुनय विनय करते हुए तीन दिन बीत गए और कृपालु राम जी का धीरज टूट गया और वे क्रोधित हो गए :

बिनय न मानत जलधि जड गए तीन दिन बीति ।

बोले राम सकोप तब, भय बिनु होइ न प्रीति ।।

लछिमन बान सरासन आनू ।

सोषौं बारिधि बिसिख कृसानू ।।

वे लक्ष्मण से बोले- ' हे लक्ष्मण! मेरा अग्नि बाण लाओ । मैं इस समुद्र को अभी सुखाए देता हूँ ।' 

प्रभु ने कहा: 

सठ सन बिनय कुटिल सन प्रीती ।

सहज कृपन सन सुन्दर नीती ।।

ममता रत सन ग्यान कहानी ।

अति लोभी सन बिरति बखानी ।।

क्रोधिहि सम कामिहि हरिकथा ।

ऊसर बीज बएं फल जथा ।।

" मूर्ख से विनय, कुटिल से प्रीति, कंजूस से सुंदर नीति, मोह माया में फंसे मनुष्य से ज्ञान की कथा, लोभी से वैराग्य का वर्णन, क्रोधी से शांति की बात, कामी पुरूष से भगवान की कथा, इस प्रकार व्यर्थ हो जाती है, जैसे ऊसर भूमि में बीज बोना व्यर्थ हो जाता है ।"

स्मरण मात्र से राम भक्तों का उद्धार करने वाले, संकटों से पार लगाने वाले, अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता हनुमान स्वामी महाराज सबका मंगल करें, कष्ट हरें, जीवन सफल करें ।


🌷 जय सिया राम 🌷

जय सियाराम

 जात पवनसुत देवन्ह देखा ।

जानैं कहुँ बल बुद्धि बिसेषा ।।

सुरसा नाम अहिन्ह कै माता ।

पठइन्हि आइ कही तेहिं बाता ।।

अपने लक्ष्य की ओर चले हनुमानजी को देखकर देवताओं ने सोचा-

 हनुमानजी  बल और विद्या की परीक्षा मे तो कई बार अपनी प्रतिभा का परिचय दे चुके हैं, लेकिन राक्षसों के बीच जाकर  सकुशल लौट आने की बुद्धि इनमे है या नही, यह बात जान लेना चाहिए ।

परीक्षा लेने के लिए उन्होंने दक्षपुत्री नागमाता सुरसा को भेजा

आज सुरन्ह मोहि दीन्ह आहारा ।

सुनत बचन कह पवनकुमारा ।।

राम काजु करि फिरि मैं आवौं ।

सीता कइ सुधि प्रभुहि सुनावौं ।।

तब तव बदन पैठिहउं आई ।

सत्य बचन मोहि जान दे माई ।।

सुरसा ने कहा कि "आज मुझे प्रारब्धवश भोजन मिला है, मै पेट भर खाऊँगी" । 

इस पर हनुमानजी ने कहा कि " मुझे श्री राम जी का कार्य पूरा कर आने दो, फिर खा लेना । हे माता ! मै सत्य कह रहा हूँ । मै अवश्य आउंगा, तब मुझे खा लेना । मै मृत्यु से नही डरता । मुझे अभी राम काज के लिए जाने दो ।"

अपना जीवन राम काज मे समर्पित करने वाले, भक्ति और आत्म विश्वास की प्रतिमूर्ति भगवान

मंगलमूर्ति  हनुमान स्वामी महाराज आपका मंगल करें, कष्ट हरें । आपको अपने लक्ष्य तक पहुंचने मे सक्षम बनाएं ... 👏

जय सियाराम 2

 जात पवनसुत देवन्ह देखा ।

जानैं कहुँ बल बुद्धि बिसेषा ।।

सुरसा नाम अहिन्ह कै माता ।

पठइन्हि आइ कही तेहिं बाता ।।

अपने लक्ष्य की ओर चले हनुमानजी को देखकर देवताओं ने सोचा-

 हनुमानजी  बल और विद्या की परीक्षा मे तो कई बार अपनी प्रतिभा का परिचय दे चुके हैं, लेकिन राक्षसों के बीच जाकर  सकुशल लौट आने की बुद्धि इनमे है या नही, यह बात जान लेना चाहिए । 

परीक्षा लेने के लिए उन्होंने दक्षपुत्री नागमाता सुरसा को भेजा ।

आज सुरन्ह मोहि दीन्ह आहारा ।

सुनत बचन कह पवनकुमारा ।।

राम काजु करि फिरि मैं आवौं ।

सीता कइ सुधि प्रभुहि सुनावौं ।।

तब तव बदन पैठिहउं आई ।

सत्य बचन मोहि जान दे माई ।।

सुरसा ने कहा कि "आज मुझे प्रारब्धवश भोजन मिला है, मै पेट भर खाऊँगी" । 

इस पर हनुमानजी ने कहा कि " मुझे श्री राम जी का कार्य पूरा कर आने दो, फिर खा लेना । हे माता ! मै सत्य कह रहा हूँ । मै अवश्य आउंगा, तब मुझे खा लेना । मै मृत्यु से नही डरता । मुझे अभी राम काज के लिए जाने दो ।"

अपना जीवन राम काज मे समर्पित करने वाले, भक्ति और आत्म विश्वास की प्रतिमूर्ति भगवान

मंगलमूर्ति  हनुमान स्वामी महाराज आपका मंगल करें, कष्ट हरें । आपको अपने लक्ष्य तक पहुंचने मे सक्षम बनाएं ... 👏

Friday, March 13, 2020

अब रैन कहाँ रे... 

जाग मुसाफिर अब क्या सोवत 
भोर भई अब रैन कहाँ रे |
ज्ञान से महकी सारी दिशाएँ 
तेरी मंज़िल तुझको पुकारे ||

बरसों  बीते भाग पे रोते 
सूख गईं अँखियों की नदियां |

जीवन के दिन ऐसे बीते 
बीत गईं हों जैसे सदियाँ |
|
दीप जला अपने हाथो से 
कर ले जीवन मे उजियारे ||

विद्यालय है ज्ञान का मंदिर
अक्षर के यहाँ दीप जले हैं |

उड़ता जाये मन का पंछी 
पलकों पे फिर सपने सजे हैं ||

सुख दुख के सब भेद हैं खुलते,
आते जब हम इसके द्वारे ||

Friday, March 6, 2020


अद्भुत प्राकृतिक सौन्दर्य को समेटे अमर स्वातंत्र्य वीरों की  धरती
अंडमान निकोबार द्वीप पुंज

अमर शहीदों का ये मंदिर
सारे जहां मे सबसे सुंदर | 
श्रद्धा के हम फूल चढ़ाएँ,
इनकी कहानी भूल न जाएँ ||

सारे जहां से सुंदर
'अंडमान' द्वीप हमारा |
सागर मे  मोतियों सा
'निकोबार' द्वीप प्यारा ||

कुदरत का है एक करिश्मा
देखो 'लाइम-केव' ये अपना |
पंछी गाये गीत खुशी के
'पैरट' द्वीप है सबका सपना ||

'सेल्यूलर' और 'रॉस' मे  बसती
सदियों की एक अमर कहानी |
नाचा था कभी मोर मयूरा
ये गाथा होगी न पुरानी ||

आओ चलें हम उस दुनिया मे
रहती हैं जहां जल की परियाँ ||
'जौली-बोय' की इन लहरों मे
बजती हों जैसे पायलिया  ||

मजहब की दीवार नहीं है
भाषा की तकरार  नहीं है |
एक लहू है, एक तिरंगा
बसता दिलों मे प्यार वही है ||

सारे जहां से सुंदर
'अंडमान' द्वीप हमारा |
सागर मे  मोतियों सा
'निकोबार' द्वीप प्यारा ||


( पोर्ट ब्लेयर मे द्वीप पर्यटन उत्सव के उद्घाटन अवसर पर  इस गीत पर  नृत्य निर्देशिका श्रीमती सी॰ जे ॰ मेरी, अनुराधा गनेशन और जाने माने गायक अविनाश के निर्देशन मे मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया गया )

Wednesday, April 27, 2016

आहिस्ता आहिस्ता पहचान खोने लगते है एहसास ।
मगर ये जानते हैं वो कि कभी नही मरते हैं एहसास।।

उठती जरूर है जिंदगी में वक्त की आंधी।
मगर जीने की तमन्ना नही छोड़ते हैं एहसास।।

इनके साथ होता है जिंदगी भर का नाता।
आखरी सांस तक भी नही बिछड़ते हैं एहसास।।

लफ्जों का जब वो घोंटते हैं गला।
खामोशियों में तब सिसकियाँ भरते हैं एहसास।।

समझते है वो कि कर लिया खुद को जुदा।
नादानी पर उनकी, हँसते हैं एहसास।।

जख्म उधर हो या इधर, बात एक है।
क्योंकि दर्द की हर टीस पर सिहर उठते हैं एहसास।।

सरहदें खींच दो बेशक हमारे दरम्यान।
डोर दिलो की टूटती नही, कहते हैं एहसास।।

जाने क्या खो सा गया है।
तलाश में जिसकी, भटकते हैं एहसास।।

न कोई राह है, न मंजिल और न ठिकाना।
जाने किस सफर में, निकलते हैं एहसास।।

हो न मायूस, देख उनकी संगदिली ‘अशोक‘।
पत्थर दिल में भी लहू बन कर दौड़ते हैं एहसास।।

Wednesday, January 27, 2016

गुमनाम एहसास उनके, लौटेंगे कभी।

ज़मीर धिक्कारेगा तब, सोचेंगे कभी।।


औकात भूलकर, बने बैठे हैं खुदा,
जाना है चार कंधो पर, ये सच मानेंगे कभी।।



जो समझते हैं, खुद को शहंशाह,
छिन जाएगा ये ताज, तब पछताएंगे कभी।।



बेशक आज मुझे भूल जाएं वो,
पर यादों के जुगनू टिमटिमाएंगे कभी।।



क्या जुर्म किया, जो भुगते सज़ा,
वक्त आने पर ये सवाल पूछेंगे कभी।।



चल दिए आखिर, वो अपने सफर पर,
लेकिन मुड़कर रास्ते पर, हमें देखेंगे कभी।।



ये दिल है, कोई खिलौना नहीं,
एक दिन वे ये महसूस करेंगे कभी।। 



मायूस न हो, खुदगर्ज दुनिया में अशोक,
कुछ हाथ दुआओं के उठेंगे कभी।।

Friday, January 8, 2016


लेता है वक्त, हर शख्स का इम्तहान।

बच नही सकता इससे, कोई भी इंसान।।



हम महफूज हैं, सुकून-ए-अमन की फिजा में,
क्योंकि सरहद पर लुटाते हैं,  फौजी अपनी जान।।



होशो-हवास खोकर, दीवाने सी हुई उनकी हालत,
वतन की तकदीर लिखते थे जो, बनकर हुक्मरान।।



कुदरत भी अब, बदलने लगी है चेहरे,
ये हुनर भी इसे, आखिर सिखा गया इंसान।।



जमीर-ईमान, सब कुछ बिकता है यहाँ,
आदमी बन गया है, चलती फिरती दुकान।।



सुनते थे दोस्ती में, बसता है खुदा,
 बदलते वक्त में मगर, गुम हुई वो पहचान।।



तुझको पाने की हसरत, निकलेगी न दिल से,
तू चाहे जितना जोर लगा, या ले ले मेरी जान।।



बिछड़े दिल, क्या मिल पाते हैं कभी,
यक़ी नही होता सुनकर तेरी दास्तान।।



उन खुबसूरत एहसासों के नाम, कर दी जिंदगी हमने,
ऐ मौत तुझे दूँ मैं क्या, नही बचा अब कोई सामान।।



सह लेगा ‘अशोक‘ हर दर्द, गर  है तू उसके साथ,
टपकेंगे अश्क बेशक, पर बोलेगी सच ये जुबान।।

Monday, March 9, 2015

‘अंडमान दिवस’ 

10 मार्च 1858 को सिमरेमिस नामक जहाज से 200 बंदियों का जत्था ही केवल अंडमान नहीं आया, बल्कि साथ आई त्याग और बलिदान की कभी न भूली जा सकने वाली वो कहानी, जिसके किरदारों ने अपनी तकदीर को इस जमीन से जोड़कर एक नए इतिहास की रचना की |


उनकी पलकों के सपने थके जरूर थे, घायल जरूर थे,पर मरे नहीं थे | क्योंकि वतन की राह पर सब कुछ लुटाने की ख्वाहिश लिए, सर पर कफ़न बांधकर चले उन दीवानों को शायद, तकदीर का हर फैसला मंज़ूर था |

10 मार्च की उस तारीख से आज तक, अंडमान की इस धरती ने 150 वर्षों से भी अधिक समय की लम्बी यात्रा तय की है | यात्रा में धूप-छाँव, बरसात और बसंत के कई मौसम आये, लेकिन यात्रा फिर भी जारी रही |


आज़ादी के उन दीवानों की टोली से बस्ती तक...

और बस्ती से लेकर दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने का हौसला लिए आज के अंडमान तक की ये यात्रा ... आज़ादी, जूनून और ज़िंदगी की कहानी ही बयान करती है |

.... लेकिन ज़रा सुनिए तो.. ये हवा हमसे क्या कहना चाह रही है | आईये चलें..अपनी जड़ों की ओर...महसूस करें उन पलों की गर्माहट को..और अपने कर्म को उस दिशा में मोड़कर इस धरती को बनाये, उनके सपनों का अंडमान |


‘अंडमान दिवस’ की सभी द्वीपवासियों को शुभकामनाएं |




साभार: कार्यक्रम ‘आमने-सामने’,आकाशवाणी,पोर्ट ब्लेयर 

Sunday, January 4, 2015

आखिर आतंकवाद का खूनी खेल कब तक ?

रक्त-रंजित संस्कृति है,
नर पिशाच करते हैं तांडव |

पराकाष्ठा क्षमादान की,
नीलकंठ बन खडा है मानव ||

आखिर..

नर के भेस में, पिशाच की आकृति कब तक |
नियति मान निर्दोष प्राणों की आहुति कब तक |
मानव रक्त की नरभक्षी को स्वीकृति कब तक |
काल के क्रूर पाश में घायल संस्कृति कब तक |


Thursday, January 1, 2015

                                नव वर्ष की सभी दोस्तों को शुभकामनाएं |
करें स्वागत हम नए वर्ष का ||
नया साल दे रहा है दस्तक,

मुस्कान खिल उठी फिर अधरों पर |

भूल कर कडवाहट हम सब 

करें आह्वान फिर उत्कर्ष का ||

करें स्वागत हम नए वर्ष का ||
नए स्वप्न, उम्मीदों को ले फिर,

चले नए सफ़र पर यारों |

हम सब मिल कर करें जो कोशिश,

नामुमकिन कुछ भी नहीं यारों ||

आशा के हम दीप जब दीप जलाकर 

अभिनन्दन हम करें हर्ष का ||

करें स्वागत हम नए वर्ष का ||
भूली ना जा सकेंगी हमसे

बीते वर्ष की सुनहरी यादें |

खुशहाली की चाह में हमने 

किये थे फौलादी वो इरादे ||

पुकारती है मंजिल फिर हमको 

साथ न छोड़े अपने संकल्प का ||

करें स्वागत हम नए वर्ष का ||